उत्तरकाशी के लोंथरू गांव की रहने वाली सविता कंसवाल भी उन पर्वतारोहियों में शामिल थी, जो द्रौपदी का डांडा में हुए हादसे का शिकार हुए . सविता ने इसी साल मई के महीने में 15 दिन के अंदर एवरेस्ट और माउंट मकालू पर्वत पर सफल आरोहण कर नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किया था. लेकिन अफसोस कि जो सविता दुनिया की सबसे उंची चोटी को इतने कम समय में फतह कर आई थी , वो अपने ही जिले में मौजूद एक पर्वत में आरोहण करते वक्त हादसे का शिकार हो गई.
एनआईएम के प्रधानाचार्य अमित बिष्ट ने हादसे में एवरेस्ट विजेता सविता कंसवाल की मौत की पुष्टि की है. सविता उत्तरकाशी जनपद की एक उभरती हुई पर्वतारोहियों थी. जिसने बेहद कम समय में पर्वतारोहण के क्षेत्र में अपना नाम बनाया था. सविता ने से नेहरु पर्वतारोहण संस्थान से एडवांस और सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स के साथ पर्वतारोहण प्रशिक्षक का कोर्स किया था. मंगलवार देर शाम सविता की मौत की खबर आने के बाद उसके गांव सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर फैल गई है.
सविता चार बहनों में सबसे छोटी थी. घरवालों के विरोध के बावजूद सविता ने एनसीसी ट्रेनिंग लेनी ली थी. उत्तरकाशी की ही महान पर्वतारोही बछेंद्री पाल को अपना आदर्श मानने वालु सविता ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2013 में नेहरु पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से पर्वतारोहण का बेसिक कोर्स किया और साल 2016 में अडवांस कोर्स पूरा किया. कोर्स की फीस लेने के लिए सविता ने देहरादून की एक कंपनी में काम भी किया. वो साल 2018 से नेहरु पर्वतारोहण संस्थान में प्रशिक्षक के पद पर तैनात थी. 2019 में इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन के एवरेस्ट कैंप के लिए 1000 लोगों के बीच चुने गए 12 प्रतिभागियों में सविता भी एक थीं.
उसका ये माउंट एवरेस्ट तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, विपरीत परिस्थितियों में भी वो अपने लक्ष्य से नहीं भटकी, और बुलंद हौसलों के साथ 2013 से वो अब तक 12 चोटियों पर चढ़ चुकीं थी.
साल 2021 में सविता कंसवाल ने एवरेस्ट मासिफ अभियान के तहत दुनिया की चौथी सबसे ऊंची चोटी माउंट ल्होत्से पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की. सविता ल्होत्से पर्वत पर तिरंगा फहराने वाली भारत की दूसरी महिला पर्वतारोही हैं.
असल में, नेहरु पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से 122 लोगों का दल 22 सितंबर को द्रौपदी का डांडा-2 पर्वत पर पर्वतारोहण के लिये निकला था. दल को दस अक्टूबर को पर्वत पर झंडा फहराना था. इस दल में बेसिक और एडवांस कोर्स के 44 प्रशिक्षू, 24 प्रशिक्षक, एक ऑफिसर थे. इसके अलावा अन्य स्टाफ भी था. मंगलवार की सुबह को 28 सदस्य एडवांस दल डोकरानी बामक ग्लेशियर को पार कर रहा था. जबकि आठ सदस्य बेसिक दल तकरीबन आठ किलोमीटर पीछ बेसकैंप में पढ़ाव डाले हुये था. बाकि उससे भी पीछे थे.
बताया जा रहा है कि 28 सदस्य दल जैसे ही डोकरानी बामक ग्लेशियर को पार कर रहा था, उसी समय उपर पर्वत से एवलांच टूट कर उनके उपर गिर गया. जिससे सभी 28 सदस्य दल उसके नीचे दब गया. कुछ देर बाद जब बेसकैंप में इसकी सूचना मिली तो हड़कंप मच गया। एसडीआरएफ और एनआईएम से बचावदल मौके पर रवाना हुआ. सबसे पहले नीचे आठ सदस्य बेसिक दल को रेस्क्यू कर safe जगह पहुंचाया गया.
इस बचाव अभियान में सबसे मुश्किल था 28 सदस्य दल को बचाना. इस 28 सदस्य दल के साथ ही प्रशिक्षक सविता कंसवाल भी थी. बाद में चौपर की मदद से ग्लेशियर में दबे नौ सदस्यों को बाहर निकाला गया. उनमें सभी दस की मौत बताई जा रही है. इसी दौरान मौसम खराब हो गया और बचाव अभियान को रोकना पड़ा.
लापता करीब 25 पर्वतारोहियों की खोजबीन के लिए घटना के दूसरे दिन बचाव अभियान शुरू कर दिया गया. अभी तक 10 शव बरामद किए जा चुके हैं. वहीं 14 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है.
एडवांस कैंप से एसडीआरएफ व नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की टीम ने भी अपना खोज बचाव अभियान शुरू कर दिया. बुधवार को हर्षिल आर्मी हेलीपैड से चीता हेलीकॉप्टर से छह घायलों को लाया गया. इसमें एक प्रशिक्षक व पांच प्रशिक्षु घायलों को मातली उत्तरकाशी पहुंचाया गया है. सभी को हल्की चोट आई हैं