उत्तराखंड के समाज में ढोल की अहमियत सभी वाद्य यंत्रों में सर्वोच्च है. जन्म के मृत्यु तक होने वाले सभी संस्कारों में ढोल की यहां भूमिका होती है. कितने ही संस्कार और सामाजिक-धार्मिक आयोजन ऐसे हैं जिनकी ढोल के बिना कल्पना भी नहीं हो सकती. जानिए ढोल का इतिहास और इसकी अहमियत से जुड़े तमाम पहलुओं को लेखक नन्द किशोर हटवाल के साथ.