कमाल के फ़सकबाज थे फ़सकू बौड़ा. उनका जिक्र आज इसलिए क्योंकि आज देश का पूरा मीडिया ही फ़सकू बौड़ा बन चुका है. बल्कि फ़सकू बौड़ा तो सिर्फ़ बच्चों के मनोरंजन के लिए कहानियाँ गढ़ा करते थे लेकिन आज का मीडिया तो अपने स्वार्थ, TRP और मुनाफ़े के लिए खबरें गढ़ रहा है और ऐसी घातक खबरें गढ़ रहा है जिनसे कहीं दंगे भड़क जाते हैं तो कहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को बट्टा लग जाता है. बीते हफ़्ते जब देश के जवान सीमाओं पर लड़ रहे थे तब तो मीडिया के लिए झूठी खबरें पकाना का जैसे स्वर्णिम अवसर आ गया था. किसी मीडिया घराने ने कराची पर क़ब्ज़ा कर लिया था तो किसी ने इस्लामाबाद हथिया लिया था. सिर्फ़ इसलिए कि ऐसी भ्रामक खबरों से ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा पीट लिया जाए फिर चाहे देश की छवि भी धूमिल होती हो तो होती रहे. और ये हरकतें किसी IT सेल के ट्रोल का गुमनाम सोशल मीडिया हैंडल नहीं बल्कि बाक़ायदा देश के सबसे ज़्यादा TRP वाले चैनल कर रहे थे.