भ्रष्टाचार में एक बक्की-बात की विशेषता होती है. वो हमारे जितना नज़दीक और आस-पास घट रहा होता है, हमें उतना ही कम नज़र आता है और उतना ही मामूली और स्वीकार्य लगता है. जबकि दूर से दिखाई पड़ने पर वो भयावह और विकराल भी नज़र आता है और हमें चौंकाता भी खूब है. CAG की रिपोर्ट्स का ही उदाहरण लीजिए. उसमें जब सामना आता है कि अलाने विभाग ने इतने करोड़ सपोड दिए और फलाने ने तो पूरी योजना ही घाम लगा दी तो हम खूब चौंकते हैं लेकिन असल में योजनाएँ हमारी आँखों के ठीक सामने ही घाम लग रही होती हैं और हमारा ध्यान तक उन पर नहीं जाता जब तक कोई अपवाद न हो जाए. वैसा ही अपवाद जैसा बीते हफ़्ते विकास नगर से विधायक मुन्ना सिंह चौहान के साथ हुआ.