देहरादून में दलाई लामा के जो निशां बाकी हैं

  • 2022
  • 10:37

लगभग 63 साल पहले 1959 को दलाई लामा अपने हजारों अनुयायियों के साथ सबसे पहले मसूरी पहुंचे थे। उस समय उनकी उम्र 23 साल नौ महीने थी। जहां वो बिड़ला हाउस में अपनी मां के साथ एक साल रहे। यही उनका भारत में पहला घर था। इस घर में वो तब तक रहे, जब तक उन्हें धर्मशाला के समीप मैक्लोडगंज में स्थाई घर नहीं मिल गया। मसूरी में बिताये उस एक साल के बारे में दलाई लामा ने अपनी आत्मकथा ‘फ्रीडम इन एक्ससाइल’ में विस्तार से लिखा है। उन्होंने लिखा, जब वो मसूरी पहुंचे तो उन्हें लगा था कि कछ ही समय की बात होगी और वो जल्द ही अपने घर ल्हासा लौटेंगे। लेकिन ये एक साल हताशा से भरे रहे। जब दलाई लामा मसूरी पहुंचे थे, उस वक्त तक उनके साथ तकरीबन साठ से सौ अनुयायी ही साथ आये थे। जो मसूरी के हेप्पी वैली में बसे। इसे दलाई हिल्स के नाम से भी जाना जाता है। सोंग्स्टन लाइब्रेरी के सीनियर मोंक नामग्याल ग्वालपो डुन्दूक बताते हैं कि इन एक साल में दलाई लामा ने मसूरी से देहरादून, दिल्ली या अन्य जगह यात्रा करने के लिये मर्सिडीज कार डीबीटी 8469 का उपयोग किया था। जब दलाई लामा धर्मशाला जा रहे थे, तो उन्होंने ये कार लाइब्रेरी के तत्कालीन अध्यक्ष को दान में दे दी। उन्होंने कहा था कि इस कार को लाइब्रेरी के कामों में उपयोग में लाया जाए। लेकिन, ये कार हमारे धर्मगुरु की थी। लिहाजा, उसे हम ‘होली कार’ मानते हैं। इसलिए उसे कांच के शीशे के अंदर रखा है। ये कार अभी कुल्हान में मौजूद शॉंगस्टन लाइब्रेरी के बाहर कांच के शीशे वाले सेड में 1964 से रखी गई थी। उन्होंने बताया इसके अलावा देहरादून के क्लेमेंटटाउन में बहुत संख्या में तिब्बती शराणार्थी रहते हैं। यहां एक मिन्द्रोल्लिंग मठ है। इनके तिब्बती शैली के भवन, स्तूप और गोम्पा बड़े ही सुंदर लगते है। तिब्बती भाषा में मिन्द्रोल्लिंग शब्द का अर्थ है पूर्ण मुक्ति का स्थान। पहला मिन्द्रोल्लिंग मठ 1676 में तिब्बत में स्थापित किया गया था। देहरादून में छठा मिन्द्रोल्लिंग मठ 1965 में स्थापित किया गया था।

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