समान नागरिक संहिता के लागू होने से उत्तराखंड में क्या कुछ बदल गया, किस-किस पर लागू होगा नया क़ानून, नागरिक की परिभाषा में बदलाव के क्या असर होंगे, Live-in Relationship से संबंधित प्रावधानों का क्या असर होगा और क्यों उत्तराखंड की अनुसूचित जनजातियों को इस क़ानून के दायरे से बाहर रखा गया है?
जानिए इन तमाम सवालों के जवाब UCC Drafting Committee की सदस्य रही प्रोफ़ेसर सुरेखा डंगवाल से.