क्या सभी गढ़वाली और कुमाऊनी लोग अनुसूचित जनजाति में शामिल हो सकते हैं और क्या उत्तराखंड का पूरा पर्वतीय क्षेत्र संविधान की पाँचवीं अनुसूची में शामिल किया जा सकता है? जानिए इससे जुड़े तमाम सवाल-जवाब ‘उत्तराखंड एक मंच’ के संयोजक अनूप बिष्ट से.